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June 28 गुरु के बचन
पिछली बार आपने गुरु बानी का रस लिया । अब पेश है उससे आगे एक और कविता जो कि पिछली बार के प्रसंग पर ही आधारित है ।
आ बचवा , चल चिलम लगा दे !
रात भई , जी अकुलाता है कैसा तो होता जाता है ऊ ससुरा रमदसवा सरवा अब तक रामचरित गाता है रमदसवा जल्दी सो जाए ऐसा कोई इलम लगा दे !
आ बचवा , अन्दरवा आजा हौले से जड़ दे दरवाजा रामझरोखे पे लटका दे तब तक यह बजरंगी धाजा ।
हाँ , अब , सब कुछ बहुत सही है फट से ‘फायर फिलम’ लगा दे !
अंत मे जिस ओर इशारा है वह साफ़ है - 'फट से फायर फिलम लगा दे' । धार्मिक चीजों पर गंभीर व्याख्यान देना , सम्प्रदायवाद आदि के बारे में लेख आदि लिखने के समानांतर ये कविताएं साधुओं - महंतों के भ्रष्टाचार उजागर करती हैं ।
ये सारी रचनाएं 'परिकथा' नामक पत्रिका से ली गयीं हैं । आप सब तक पहुँचाने का माध्यम बन कर आपके बीच मुस्कुरा रहा हूँ । गुरु बानी
खैनी चूना बिन दुःख दूना सब जग सूना लागे है मैं तो मैं ना ही हूँ , बचवा ! तू भी तू ना लागे है।
राम - नाम से जी उचटे है जब से डिबिया खतम भई आकुल मनवाँ सिमरन – पथ से किधरो – किधरो भागे है ।
तू तो, बचवा ! दया धरम का बड़ा धनी है , कर्मठ है नेम – जोग व्रत – संजय में भी सब भगतन से आगे है ।
जा बचवा , चुपके से लइहो चमटोली से चुटकी भर मेरा नाम न लीहो, कइहो – नया भगतवा मांगे है ।
साधु महात्माओं के कितने चरित्र भ्रष्ट होते हैं “गुरु बानी” बतलाती है। भ्रष्ट ---- शब्द आगामी प्रस्तुति के लिये है । :) नोट - अध्ययन के दौरान मिली कुछ नायाब कृतियाँ । आगे जारी है …………… बारिश हो रही हैबारिश हो रही है कई दिनों से कुछ पल आसमान को देख लेने की मोहलत देकर बादलों का जत्था उमड़ता हुआ आकाश को घेरे है,और बारिश हो रही है
नन्हें नन्हों का एक दल बारिश मे भीगता हुआ मछलियाँ पकड़ने की असफल कोशिश करता हुआ हाथ में आ रही हैं केवल बारिश की बूँदें इनके अन्दर बाल उमंग की जोरदार बारिश हो रही है
असंख्य गिरती बूँदों से भीग उठे हैं गुलशन सर्द हवाएँ मन को गुदगुदा रही हैं नए जोड़े तलाश रहे हैं एकांत प्रेमियों की भाँति उनके रग-रग से प्रेम रूपी वासना की बारिश हो रही है
टूटी झोपड़ी में दुबके बच्चे खाने की बाट जोहते और माँ पानी से भर चुके चूल्हे को सूनी आँखो से एकटक निहार रही है टपकते छप्पर को देख पिता के मुँह से ,खीस भरी गालियों की बारिश हो रही है
मृत देह नीम तले रखी हुई जलता हुआ दीप बुझकर पानी में तैरता हुआ एक अजीब सी खामोशी घेरे है , इस रोने गाने के शोर के बीच भीगते परिजनों की आँखो से बारिश की बूँदों मे घुले आंसुओं की बारिश हो रही है June 22 पशु ज्ञानएक दिन एक भूखा लड़का एक दुकान से रोटी चुराकर भागने लगा । आगे - आगे लड़का पीछे - पीछे दुकानदार । इतने मे एक कुत्ते ने झपट्टा मारकर रोटी लड़के से छीन ली और एक तरफ़ रवाना हो गया । रोटी के यूँ छिन जाने से लड़का हताश होकर रूक गया । इतने मे दुकानदार ने आकर लड़के की धुनाई शुरु कर दी । यह देख रोटी ले जाता कुत्ता ठिठक गया । उसने रोटी छोड़ कर दुकानदार पर छलांग लगा दी । मौका देख लड़का वहाँ से निकल गया । लस्त पस्त दुकानदार ने भाग लेने मे अपनी भलाई समझी । भूखे लड़के की सहायता कर कुत्ते की आँखों से संतोष की अविरल धारा बह रही थी । नोट – उपरोक्त लघुकथा पुरानी है । आजकल के कुत्ते , कुत्ते ही होते हैं । बिना बात के बिगड़ पड़ते हैं । अभी कल मैं सब्जी लेकर घर आ रहा था बीच मे एक कुत्ते से नोंक झोंक हो गयी । तभी उपर दो मंजिले मकान से आवाज आयी कि बंटी बंटी कहो तो कुत्ता मान जायेगा । मैने कहा – भाई आपका क्या नाम है , वे बोले – राहुल ! मैनें कहा – तब राहुल – राहुल बोलना पड़ेगा । तब इ ससुरा मानेगा । वे बोले – क्यों । मैनें कहा – छोटों को समझाने के लिए बड़े को बुलाते हैं । इतना सुन कर उपर से वे भी भौकने लगे । मैने एक ईट उठाई और कुत्ते को दिखाई । कुत्ते ने समझ लिया कि अब उसकी खैर नही और भाग गया । लेकिन उपर से भौकने की आवाज बंद नही हुई । मैने ईट उपर भी दिखाई और कहा – ये तेरे लिये ही उठाई हैं । मैनें जैसे ही सामाजिक औकात दिखाई तो वे भौकना छोड़ कर बतियाने लगे बोले – वो कुत्ता सबको ऐसे ही परेशान करता है । लेकिन काटता नहीं है ………………… मैनें मन ही मन कहा – आपके जैसा होगा । और आगे बढ़ चला । |
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